विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार (एसटीआई): गुजरात में सार्वजनिक क्षेत्र में स्टार्टअप्स के लिए प्रोत्साहन योजना –

गुजरात सरकार ने विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार (एसटीआई) नामक योजना के रूप में स्टार्टअप के लिए एक प्रोत्साहन योजना की घोषणा की है। यह योजना पायलट तैनाती और प्रदर्शनों के साथ अनुसंधान और विकास में स्टार्टअप के लिए सहायता प्रदान करेगा। यह योजना नवाचार निधि और स्टार्टअप्स का एक हिस्सा है, जो सार्वजनिक क्षेत्रों में काम कर रहे है, इस योजना के लिए पात्र है। इस योजना के माध्यम से स्टार्टअप उन तकनीकों पर काम कर रहे है, जो योजना के तहत राज्यों के नागरिकों के सबसे महत्वपूर्ण और आम मुद्दों को हल करती है।

योजना का प्राथमिक उद्देश्य स्टार्टअप्स को सशक्त बनाना है और उन्हें सफल बनाने में मदत करना है। इस योजना की घोषणा गुजरात सरकार के मुख्य सचिव जे एन सिंह ने की है। ५० करोड़ रुपये के समर्पित निधि विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार (एसटीआई) नीति के लिए प्रावधान किया गया है।

                                                                                  Science,Technology & Innovation (STI)  (In English)

विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नई खोज (एसटीआई) योजना क्या है: गुजरात सरकार द्वारा राज्य में  स्टार्टअप्स के लिए एक प्रोत्साहन योजना है।

विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नई खोज (एसटीआई) योजना का लाभ:

  • स्टार्टअप के साथ-साथ अनुसंधान और विकास में सहायता प्रदान की जाएंगी।
  • पायलटों की तैनाती और प्रौद्योगिकियों के परीक्षण में सहायता की जाएंगी।

प्रौद्योगिकी प्रदर्शन और पायलट परिनियोजन कार्यक्रम:

  •  गुजरात विज्ञान और प्रौद्योगिकी पर परिषद (जीयुजेसीओएसटी) द्वारा लागू किया जाने वाला एक कार्यक्रम है। स्टार्टअप जटिल सामाजिक और प्रौद्योगिकी के लिए समाधान तैनात कर सकता है और इसका परीक्षण कर सकते है।
  • सरकारों को समाधान पर वास्तविक प्रतिक्रिया मिलती है जिसके आधार पर वह स्टार्टअप द्वारा विकसित उत्पाद की मदत से समाधान के कार्यान्वयन का निर्णय ले सकती है।
  • सबसे आम समस्याओं में से कुछ हैं: ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, तरल अपशिष्ट प्रबंधन, शहरी योजना, शहरी गतिशीलता, प्रदूषण कमी आदि समस्याओं का स्टार्टअप समाधान निकालेंगे।

विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नई खोज (एसटीआई) योजना के लिए पात्रता:

  • कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में एसटीआई के लिए विभाग सुरु किया जाएंगा।
  • विश्वविद्यालय के विभागों में अनुसंधान प्रयोगशालाओं में वैज्ञानिक मौजूद रहेंगे।
  • छात्र
  • स्टार्टअप, एसएमई और उद्यमी

समाधान की व्यवहार्यता का परीक्षण करने में सरकारी सहायता के कारण नवाचार निधि अनुसंधान और विकास के लिए आवश्यक समय को कम कर देगा। जिन स्टार्टअप्स के पास पहले से ही आम समस्याओं का समाधान है, वे उन्हें प्रदर्शित कर सकते है और उनका विपणन कर सकते है।

समाधान कैसे चुने जाते हैं?

  • एक तकनीकी सलाहकार समिति का गठन किया जाएंगा।
  • यह सभी प्रस्तावों का मूल्यांकन करेगा।
  • फिर प्रस्तावों को उच्च शक्ति समिति के पास भेज दिया जाएंगा।
  • इसकी अध्यक्षता मुख्य सचिव करेंगे।
  • वह तैनात किए जाने वाले समाधानों को मंजूरी देगा।

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