मुख्यमंत्री आशीर्वाद योजना: हिमाचल प्रदेश में नए पैदा हुए बच्चे के लिए नि:शुल्क शिशु किट –

हिमाचल प्रदेश सरकार ने मुख्यमंत्री आशिर्वाद योजना शुरू की है और राज्य के सरकारी अस्पतालों में पैदा हुए नए बच्चों को नि:शुल्क शिशु किट प्रदान की जाएंगी।नवजात शिशुओं को १,५०० रुपये के में शिशु किट में १५ चीजे प्रदान की जाएंगी।इस योजना से राज्य में १ लाख माताओं और शिशुओं को लाभ पहुंचाने की उम्मीद है। हिमाचल प्रदेश में नि:शुल्क शिशु किट का वितरण दिसंबर २०१८  से शुरू होगा।

इस योजना का प्राथमिक उद्देश्य हिमाचल प्रदेश में परिवारों के महिला को बच्चों के जन्म के दौरान अस्पतालों में जाने के लिए प्रोत्साहित करना है।अस्पतालों में जन्म हुए बच्चे को स्वच्छ वातावरण मिलेंगा,उसके कारन नवजात बच्चे को संक्रमण होने से बचाया जाएंगा।राज्य सरकार की उम्मीदवार माताओं के लिए एक और योजना है जिसके अंतर्गत उन्हें पौष्टिक भोजन के लिए गर्भावस्था के दौरान ७०० रुपये प्रति महिना की वित्तीय सहायता प्रदान किया जाएंगी।

                                                                                             Mukhymantri Aashirwad Yojana (In English)

हिमाचल प्रदेश मुख्यमंत्री आशिर्वाद योजना: हिमाचल प्रदेश में पैदा हुए नए बच्चों के लिए एक नि:शुल्क शिशु किट वितरण योजना है।

मुख्यमंत्री आशीर्वाद योजना का उद्देश्य:

  • माताओं को प्रसव के लिए अस्पतालों में जाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएंगा।
  • इस  योजना के तहत नवजात शिशु को उचित पोषण प्रदान किया जाएंगा।
  • यह सुनिश्चित करने के लिए कि स्वच्छता शिशु देखभाल उत्पादों का उपयोग किया जाता है।

मुख्यमंत्री आशीर्वाद योजना का लाभ:

  • इस योजना के माध्यम से नवजात शिशुओं को नि:शुल्क शिशु किट प्रदान की जाएंगी।

मुख्यमंत्री आशीर्वाद योजना के लिए पात्रता:

  • यह योजना केवल हिमाचल प्रदेश में लागू है।
  • नि:शुल्क शिशु किट केवल उन लोगों को दी जाएगी जिनका जन्म सरकारी अस्पतालों में हुआ है।

शिशु किट में मिलने वाली चीजे:  मुख्यमंत्री आशिर्वाद योजना के नई किट में १५ चीजे है: सूट, वेट्स (बनियान), मखमल कपड़ा, दस्ताने की जोड़ी (डस्टेन), मोजे की जोड़ी, शारीर को मालिश करने का तेल, तौलिया, ६ नापियां, मच्छर दानी, कंबल, १ खिलौना,टूथपेस्ट और टूथ ब्रश, स्नान करने का साबुन, वैसलीन और माताओं के लिए तरल हाथ प्रक्षालक भी शामिल होगा।

राज्य बजट २०१८-१९ के दौरान आशिर्वाद योजना की घोषणा की गई है। इसे नवंबर २०१८  में हिमाचल प्रदेश के मंत्रिमंडल द्वारा अनुमोदित किया गया है। इस योजना को साल २०१८ के दिसंबर महीने के अंत में शुरू किया जाएगा।नि:शुल्क शिशु किट का वितरण शुरू हो जाएगा।

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शिशु देखभाल किट योजना: महाराष्ट्र में नवजात और उनकी माताओं को नि:शुल्क शिशु किट   

महाराष्ट्र सरकार ने नवजात शिशु और उनकी माताओं के लिए शिशु देखभाल किट योजना की घोषणा की है। महाराष्ट्र सरकार से शिशुओं को उपहार के रूप में २,००० रुपये की नि:शुल्क शिशु देखभाल किट प्रदान की जाएगी।यह योजना केवल उन नवजात शिशुओं पर लागू होती है जो सरकारी अस्पतालों और राज्य के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में जन्म लेते है।

इस योजना का प्राथमिक उद्देश्य उम्मीदवार महिला को सरकारी अस्पतालों और राज्य के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में नवजात शिशु को जन्म देने के लिए प्रोत्साहित करना है।गरीब और दूरदराज क्षेत्र के घरों में कई मामलों में माता पुरानी प्रथाओं के कारन अपने घर पर बच्चों को जन्म देती है।राज्य में पुरानी प्रथाओं और असुविधा के कारन माता और नवजात शिशु की मौत हो जाती है। यह योजना गर्भवती माताओं और परिवार में नवजात शिशु को जन्म देने वाले महिला को अस्पतालों में भर्ती होने के लिए प्रोत्साहित करती है।

                                                                                                                  Baby Care Kit Scheme (In English)

शिशु देखभाल किट योजना का उद्देश्य:

  • महाराष्ट्र राज्य में नवजात शिशु के मृत्यु दर को कम करना इस योजना का मुख्य उद्देश है।

नि:शुल्क शिशु देखभाल किट किसे प्रदान की जाएंगी? नवजात शिशु की माताओं और नवजात शिशु जिसका जन्म महाराष्ट्र राज्य के सरकारी अस्पताल में हुआ है,उनको नि:शुल्क शिशु देखभाल किट प्रदान की जाएंगी।

 शिशु देखभाल किट योजना का लाभ:

  • लाभार्थी नवजात शिशु को २,००० रुपये  की नि:शुल्क शिशु देखभाल किट प्रदान की जाएंगी।
  • गर्भवती माताओं को अस्पतालों में नवजात शिशु को जन्म देने के लिए प्रोत्साहित किया जाएंगा।

इस योजना को शुरू में आंध्र प्रदेश, हरियाणा और तेलंगाना राज्य में लागू किया गया था।अस्पताल में जन्म देने वाली गर्भवती माताओं की संख्या इस योजना के माध्यम से काफी बढ़ गई है।महाराष्ट्र सरकार ने नवजात शिशुओं और उनके माताओं के लिए नि:शुल्क शिशु किट के वितरण के लिए १०० करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया है।इस योजना का कार्यान्वयन साल २०१८-१९  में शुरू होगा।

शिशु देखभाल किट में वस्तुओं की सूची:  शिशु के कपड़े, शिशु के लिए एक छोटा सा बिस्तर, तौलिया, प्लास्टिक डायपर (नापियां), शरीर की मालिश का तेल, थर्मामीटर, मच्छर दानी, वूलन का कंबल, शैम्पू, नाखून कटर, हाथ मोजे, मोजे, शरीर धोने के लिए एक छोटासा बिस्तर , तरल हाथ प्रक्षालक, माताओं के लिए लोकर के कपड़े और खिलौने आदि शिशु देखभाल किट में वस्तुओं को प्रदान किया जाएंगा।

महाराष्ट राज्य का महिला एवं बाल कल्याण विभाग इस योजना को लागू करेगा। हर साल लगभग १२ लाख गर्भवती महिलाएं जन्म देती है। इनमें से ८ लाख शहरी क्षेत्रों में से है और १२ लाख ग्रामीण क्षेत्रों से है। उनमें से ४ लाख के करीब महिला पहली बार नवजात शिशु को जन्म देती है।

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इंद्रधनुष योजना: शिशुओं एवं बच्चों को बीमारियोंसे बचाने के लिए और के टीकाकरण के योजना

इंद्रधनुष योजना भारत सरकार के केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा शुरू की है। यह योजना २५ दिसम्बर २०१४ को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री श्री जे।पी। नड़्डा द्वारा सुशासन दिवस के अवसर पर घोषणा की है। इन्द्रधनुष के सात रंगो के समान सात तरह की बीमारिया जैसे डिप्थीरिया, काली खांसी, हेपेटाइटिस बी, धनुस्तभ,पोलियो, यक्ष्मा, खसरा यह सभी बीमारी से बच्चो का रक्षण करना इस योजना का मुख्य उद्देश है। मिशन इन्द्रधनुष माध्यम से सन २०२० तक भारत देश के सभी बच्चो का टीकाकरण करना है।इस योजना के माध्यम से बच्चों और गर्भवती महिलाओं को स्वास्थ्य विभाग की तरफ  मदत की जाएगी। सन २००९ से २०१३ अवधि के दौरान  टीकाकरण ६१% से ६५% तक बढा है। इसका अर्थ यह है की पिछले चार साल के दौरान प्रत्येक वर्ष मे १% की बढ़ोतरी हुई है, जोकि हर साल बढती हुई लोकसंख्या को देखते हुए बहोत कम है। इसके अलावा यह देखा जाता है की कुछ बिमारियाँ जोकि देश के बच्चों का मौत कारन बनी गई है जिसे टीकाकरण से रोका जा सकता है। मिशन इन्द्रधनुष टीकाकरण की प्रक्रिया की गती बढ़ाने ने के लिए शुरु की है। जिसका मुख्य लक्ष्य सन २०२० तक देश के सभी बच्चों को इस मिशन के अंतर्गत लाना है।

 इन्द्रधनुष योजना का लाभ:

  • इन्द्रधनुष योजना बच्चो और गर्भवती महिला को लाभ प्रदान करती है
  • योजना मे सात प्रकार के रोगों जैसे डिप्थीरिया,काली खांसी,हेपेटाइटिस बी,धनुस्तभ,पोलियो,यक्ष्मा,खसरा के लिए मुक्त मे टीकाकरण प्रदान करती है
  • बच्चें को बीमारी के खतरे से बचाने के लिए योजना उपयोगी है

इन्द्रधनुष योजना का लाभ पाने के लिए पात्रता:

  • गर्भवती महिला
  • २ साल उम्र तक के बच्चें
  • महिला और बच्चा भारत देश का निवासी होना चाहिए

इन्द्रधनुष योजना को लागू करने के लिए आवश्यक दस्तावेज:

  • महिला का आधार कार्ड
  • बच्चें का जन्म प्रमाण पत्र
  • आंगनवाड़ी द्वारा प्रदान किया गया कार्ड

इन्द्रधनुष योजना: आवेदन और टिका करण की प्रक्रिया

टीकाकरण की अनुसूची का उल्लेख निचे किया गया है ताकि आवेदन करते समय गर्भवती महिला को मदत मिल सके। महिला जहाँ संबधित अस्पताल मे भर्ती है या तो नजदीकी सरकारी अस्पतालों मे योजना की माहिती प्राप्त कर सकती है।

  • जन्म के समय: बीसीजी,ओपीवी,एचईपी बी
  • ६ सप्ताह: ओपीवी,डीपीटी,एचईपी बी
  • १० सप्ताह: ओपीवी, डीपीटी, एचईपी बी
  • १४ सप्ताह: आइपीवी, ओपीवी, डीपीटी, एचईपी बी
  • ९ से १२ महिने: खसरा,विटामिन ए,जेई
  • १६ से २४ महिने: खसरा,विटामिन ए,जेई,ओपीवी बूस्टर,डीपीटी बूस्टर

संपर्क विवरण अधिक जानकारी:

  • नजदीकी सरकारी अस्पताल मे संपर्क कर सकते है
  • आंगनवाड़ी केन्द्र मे विवरण प्राप्त कर सकता है
  • मिशन इंद्रधनुष आधिकारिक पोर्टल: missionindradhanush.in
  • नेशनल हेल्थ पोर्टल

स्मार्ट राशन योजना (एस आर वाय) पंजाब: नयी आटा दाल योजना – पात्रता, आवश्यक दस्तावेज़, आवेदन पत्र और आवेदन की प्रक्रिया

भारत सरकार के राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन (एनएफएसए)। के तहत पंजाब सरकार ने स्मार्ट राशन कार्ड योजना (SRCS) की सुरवात की है. ईस योजना के तहत लाभार्थी को राशन नई मजबूत जैव मीट्रिक प्रणाली के आधार पर वितरित किया जाएगा. राशन गरीब और जरुरतमंद लाभार्थीयों को वितरित किया जाये और जैव मीट्रिक प्रणाली के मदत से भ्रष्टाचार को रोकना यह योजना का मुख्य उद्देश है. पंजाब राज्य मे १.४१ करोड़ लोगो को नए स्मार्ट राशन कार्ड योजना के तहत लाभान्वित किया जाएगा और इस योजना के लिए सरकार आगामी बजट २०१८-२०१९ में ५०० करोड़ का बजट का प्रस्ताव करने वाली है. स्मार्ट राशन कार्ड योजना १ अप्रैल २०१८ से शुरू करने का निर्धार है.

स्मार्ट राशन कार्ड योजना (SRCS) पंजाब क्या है?

पंजाब सरकार की नई आटा दाल योजना जिसके तहत जैव मीट्रिक प्रणाली के आधार पर लाभार्थी को राशन विपरित किया जाएगा|

स्मार्ट राशन कार्ड योजना (SRCS) का लाभ:

  • पंजाब राज्य के १.४२ लोग स्मार्ट राशन कार्ड योजना (SRCS) योजना के तहत लाभान्वित किया जाए
  • गेहूं २ रूपए प्रति किलोग्राम से दिया जाएगा
  • राशन नई मजबूत जैव मीट्रिक प्रणाली के आधार पर दिया जाएगा
  • गेहूं 30 किलोग्राम पैकेजिंग मे दिया जाएगा
  • छह महीने का राशन (गेहूं) एक ही बार मे दिया जाएगा
  • राशन लाभार्थी के घर पर विपरित किया जाएगा
  • लाभार्थी बैग साथ मे रखे जिसमे उनको राशन दिया जा सके
  • एक परिवार मे परिवार के सदस्यों की संख्या के नुसार राशन मिलेगा उसके उपर राशन नही मिलेगा परिवार के सदस्य को प्रति माह 5 किलोग्राम के हिसाब से गेहूं दिया जाएगा
  • २० रूपए किलोग्राम योजना के तहत प्रत्येक लाभार्थी को आधा किलोग्राम दाल प्रति महिने के हिसाब दि जाएगी
  • एक किलोग्राम चीनी और चाय १०० ग्राम SRCS के तहत रियायती दरो पर दी जाएगी