पैनिक बटन योजना (पीबीएस): मोबाइल पे एक बटन दबाये और पुलिस बुलाये, महिला सुरक्षा के लिए सुविधा

दूरसंचार मंत्रालय ने महिलाओं की सुरक्षा के लिए पैनिक बटन योजना (पीबीएस) शुरू की है। इस योजना के माध्यम से महिला के मोबाइल फोन पर एक पैनिक बटन होगा। जब महिला किसी खतरनाक या परेशानिकी स्थिति में होंगी, तब महिलाएं इस बटन का उपयोग कर सकती है। इस बटन को दबातेही पुलिस और महिला के रिश्तेदारों को एस एम एस से सतर्क किया जाता है। इस योजना की घोषणा महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका गांधी ने की है। इस योजना का ट्रायल उत्तर प्रदेश राज्य के ४७ जिलों में चल रहा है और ट्रायल राज्य में सफल भी हो रही है। सरकार पूरे भारत देश भर में इस योजना को लागू करने की योजना बना रही है।

Panic Button Scheme (In English)

पैनिक बटन योजना (पीबीएस) क्या है? महिला के मोबाइल फोन पर एक पैनिक बटन लगाई जाएंगी। महिला को जब परेशानी में मदत की जरुरत पड़ने पर इस सुविधा का उपयोग कर सकती है (मोबाइल पर पैनिक बटन पर क्लिक करें और पुलिस को कॉल करें)

पैनिक बटन योजना का उद्देश्य:

  • महिलाओं को परेशानी में तत्काल राहत
  • महिलाओं के लिए सुरक्षा

पैनिक बटन प्रणाली कैसे काम करती है?

  • परेशानी की स्थिति जैसे की यौन उत्पीड़न, घरेलु हिंसा में महिलाएं एक पैनिक मोबाइल पर बटन का इस्तेमाल कर सकती है।
  • मोबाइल फोन स्थानीय पुलिस स्टेशन नियंत्रण कक्ष, महिला के रिश्तेदार और आस पास के स्वयंसेवकों के मोबाइल पर एसएमएस भेजेगा।
  • एसएमएस द्वारा महिलाओं के सटीक स्थान का विवरण (भू-निर्देशांक) प्रदान किया जाएंगा।
  • पुलिस टीम और स्थानीय स्वयंसेवक ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम निर्देशांक के आधार पर तुरंत घटना स्थान पर पोहच जाएंगे।

पैनिक बटन योजना की विशेषताएं:

  • आईओएस, एंडोइड और सभी सामान्य फोन में  पैनिक बटन लगाया जाएंगा। 
  •  सरकार फ़ोन में पैनिक बटन को अनिवार्य करने की योजना बना रही है।
  • यह मोबाइल फ़ोन वास्तविक प्रणाली (रीयल-टाइम) पर काम करता है और त्वरित सहायता प्रदान करती है।
  • ट्रेल की दौरान पुलिस की टीम २ मिनट और अधिकतम २६ मिनट के अन्दर घटना स्थल पर पोहची है।
  • पुलिस की टीम घटना स्थल पर पोहचने ने काऔसत प्रतिक्रिया समय ८ मिनट का है।
  • इस योजना का ट्रायल ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में आयोजित किया गया था।
  • ट्रायल के दौरान पुलिस की वैन घटना स्थल पर पहुंची और महिलाओं और बच्चों को परेशानी में मदत की गयी ।
  • ट्रायल २६ जनवरी २०१८ को शुरू किया गया है।

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