‘दीदी बगिया योजना’, झारखंड

झारखंड सरकार ग्रामीण महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए ‘दीदी बगिया योजना’ नाम से एक अनूठी योजना लेकर आई है। इस योजना के तहत राज्य में महिला स्वयं सहायता समूहों को नर्सरी उद्यमी बनने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। नर्सरी शुरू करने के लिए महिलाओं को तकनीकी सहायता और प्रशिक्षण दिया जाएगा। यह पर्यावरण अनुकूल योजना महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के तहत वृक्षारोपण के लिए विभिन्न पौधों के पौधे का उत्पादन करती है। इस योजना के तहत महिला उद्यमियों को उनके द्वारा अपनी नर्सरी में किए गए कार्य के लिए भुगतान (मानव-दिवस) भी मिलेगा। पौधों को आगे सरकार को बेचा जा सकता है जिससे अतिरिक्त राजस्व प्राप्त होता है। यह योजना महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने में सक्षम बनाएगी जिससे उन्हें सशक्त बनाया जा सकेगा।

अवलोकन:

योजना का नाम: दीदी बगिया योजना
योजना के तहत: झारखंड सरकार
कार्यान्वयन द्वारा: ग्रामीण विकास विभाग
लाभार्थी: राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में महिला स्वयं सहायता समूह
प्रमुख उद्देश्य: स्वरोजगार के अवसरों को बढ़ावा देकर महिलाओं को सशक्त बनाना और उन्हें आत्मनिर्भर बनाना

उद्देश्य और लाभ:

  • इस योजना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर और स्वतंत्र बनाना है, इस प्रकार उनकी समग्र स्थिति में सुधार करना है।
  • इसका उद्देश्य राज्य में ग्रामीण महिलाओं की रोजगार क्षमता में वृद्धि करना है।
  • यह पहल महिला स्वयं सहायता समूहों द्वारा नर्सरी उद्यमियों के रूप में स्टार्ट-अप को बढ़ावा देगी, जो अपनी नर्सरी के मालिक और संचालन कर रहे हैं।
  • इससे महिलाओं के लिए विभिन्न रोजगार और स्वरोजगार के अवसरों को बढ़ावा मिलेगा।
  • प्रशिक्षण, तकनीकी सहायता और वित्तीय सहायता राज्य सरकार द्वारा प्रदान की जाएगी।
  • महिलाओं को किए गए कार्य का नियमित भुगतान किया जाएगा।
  • इसका उद्देश्य स्वास्थ्य पर्यावरण के लिए विभिन्न सरकारी योजनाओं के तहत महिलाओं को आत्मनिर्भर यानि आत्मनिर्भर और आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ वृक्षारोपण के लिए पौधे तैयार करना है।
  • इसका उद्देश्य राज्य में ग्रामीण महिलाओं की समग्र सामाजिक-आर्थिक कल्याण स्थितियों में सुधार करना भी है।

प्रमुख बिंदु:

  • दीदी बगिया योजना राज्य में ग्रामीण महिलाओं को नर्सरी उद्यमी बनने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए शुरू की गई एक योजना है।
  • यह योजना ग्रामीण विकास विभाग द्वारा मनरेगा और झारखंड आजीविका संवर्धन सोसायटी (जेएसएलपीएस) के अभिसरण के माध्यम से लागू की जाएगी।
  • जेएसएलपीएस सीईओ, नैन्सी सहाय द्वारा योजना का विवरण प्रदान किया गया।
  • इस योजना के तहत महिला स्वयं सहायता समूहों को पौध नर्सरी की स्थापना और संचालन के लिए प्रशिक्षण और तकनीकी सहायता प्रदान की जाएगी।
  • ये नर्सरियां ऐसे पौधों का उत्पादन करेंगी जिनका उपयोग प्रदेश में विभिन्न योजनाओं के तहत हरित एवं स्वस्थ पर्यावरण के लिए पौधरोपण के लिए किया जाएगा।
  • महिलाओं को पुरुष दिवस प्रदान किया जाएगा अर्थात; उन्हें अपनी नर्सरी में किए गए काम के लिए भुगतान मिलेगा।
  • एसएचजी महिलाओं द्वारा उत्पादित पौधे सीधे मनरेगा के तहत वृक्षारोपण के लिए खरीदे जाएंगे।
  • राज्य सरकार को निर्धारित मूल्य के अनुसार बेचे गए पौधे महिलाओं को अतिरिक्त आय प्रदान करेंगे।
  • इस योजना के तहत नर्सरी शुरू करने के लिए महिलाओं को अगले डेढ़ साल तक मनरेगा के तहत सामग्री आदि सहित वित्तीय सहायता भी प्रदान की जाएगी।
  • झारखंड के विभिन्न जिलों में इस योजना के तहत वर्तमान में २३५ नर्सरी पहले ही स्थापित की जा चुकी हैं।
  • प्रत्येक नर्सरी में लगभग १०,०००-१५,००० पौधे होते हैं।
  • अगले साल तक इन नर्सरी से लगभग २५ लाख पौधे पैदा होने की उम्मीद है।
  • यह राज्य को पौधों में आत्मनिर्भर बनाएगा और अन्य राज्यों से इसे आयात करने की कोई आवश्यकता नहीं होगी।
  • इन पौधों का उपयोग मनरेगा के तहत विभिन्न योजनाओं के तहत वृक्षारोपण के लिए किया जाएगा।
  • इस पहल का उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर और स्वतंत्र बनाना है जिससे उनके जीवन स्तर में वृद्धि हो।
  • यह उन्हें सशक्त बनाएगा जिससे दीर्घकाल में सामाजिक-आर्थिक कल्याण हो सकेगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *