जनमानशे योजना पश्चिम बंगाल: महिलाओं के लिए मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता अभियान

पश्चिम बंगाल सरकार ने नागरिकों और विशेष रूप से राज्य के महिलाओं के लिए जनमानशे योजना (মানসিক স্বাস্থ্য প্রকল্পে এ বার স্বনির্ভর মহিলারা) शुरू की है। इस योजना के माध्यम से पश्चिम बंगाल राज्य में एक मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। इस योजना का मुख्य उद्देश्य मस्तिष्क से संबंधित समस्याओं का पता लगाना और लाभार्थी को तत्काल सहायता प्रदान करना है। यह योजना मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों के साथ स्व-सहायता समूहों (एसएचजी) द्वारा लागू की जाएगी।

Janamanashe Scheme (In English)

जनमानशे योजना क्या हैपश्चिम बंगाल सरकार द्वारा एक मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम।

जनमानशे योजना का उद्देश्य:

  • मस्तिष्क से संबंधित समस्याओं को तेजी से पहचाना जाएगा।
  • मानसिक स्वास्थ्य के लिए विशेषज्ञ की सहायता प्रदान की जाएगी।

जनमानशे योजना का लाभ:

  • नि: शुल्क और लाभार्थी के घर पर मानसिक स्वास्थ्य जांच-पड़ताल
  • मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दों पर विशेषज्ञ कापरामर्श प्रदान किया जाएंगा
  • लाभार्थी को नि:शुल्क उपचार

जनमानशे योजना के लिए आवेदन पत्र और आवेदन कैसे करें?

  • जनमानशे योजना के लिए आवेदन की आवश्यकता नहीं है।
  • पश्चिम बंगाल में हर कोई इस योजना के लिए पात्र है।
  • पश्चिम बंगाल राज्य का सरकारी स्वयंसेवक प्रत्येक घर में जाएंगे और मुफ्त जाच और परामर्श प्रदान करेंगे।

जनमानशे मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता योजना की विशेषताएं और कार्यान्वयन:

  • एनजीओ की मदद से योजनाएं लागू की जाएंगी।
  • एनओजी / एसएचजी में स्वयंसेवकों को नैदानिक ​​मनोविज्ञान में प्रशिक्षित किया जाएगा।
  • ये टीमें पश्चिम बंगाल राज्य के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में काम करेगी।
  • ये स्वयंसेवक राज्य के घरों की सूची की जानकारी जमा करेंगे।
  • स्वयंसेवक राज्य के प्रत्येक घर में जाएंगे और मानसिक स्वास्थ्य और मस्तिष्क संबंधी मुद्दों के बारे में जन जागरूकता प्रदान करेंगे।
  • स्वयंसेवक घरों के प्रत्येक सदस्यों के मस्तिष्क से संबंधित समस्याओं के बारे में माहिती प्राप्त करेंगे, क्योंकि कई लोग इसके बारे में  माहिती नहीं देना नहीं चाहते है।
  • मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दों वाले लोगों का जानकारी पत्र बनाया जाएगा।
  • विशेषज्ञ सूची में लोगों को उपचार प्रदान किया जाएंगा।
  • इस योजना को कार्यान्वयन करने के लिए अगले डेढ़ साल लगेंगे।
  • इसे पश्चिम बंगाल सरकार के माध्यम से लागू किया जाएगा।

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