कारखानदार योजना, जम्मू और कश्मीर

जम्मू और कश्मीर सरकार ने १६ अगस्त, २०२१ को केंद्र शासित प्रदेश में शिल्प क्षेत्र के विकास के साथ-साथ शिल्पकारों और कारीगरों की बेहतरी के लिए ‘कारखानदार योजना‘ शुरू की है। इस योजना को हस्तशिल्प और हथकरघा विभाग, कश्मीर द्वारा लागू किया जाएगा। इस योजना का उद्देश्य जम्मू और कश्मीर में कला और शिल्प क्षेत्र को पुनर्जीवित करना है। इस क्षेत्र में शोषण का सामना कर रहे शिल्पकारों और कारीगरों को सहायता मिलेगी। कारीगरों को उनके कौशल को उन्नत करने और उत्पादकता और आय बढ़ाने के लिए कौशल प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। योजना के तहत सरकार द्वारा वित्तीय सहायता भी प्रदान की जाएगी। महामारी और कठिन परिस्थितियों का सामना करने के बाद, यह योजना केंद्र शासित प्रदेश के कारीगरों के लिए वरदान साबित होगी जिससे उनका कल्याण सुनिश्चित होगा।

अवलोकन:

योजना का नाम कारखानदार योजना
योजना के तहत जम्मू और कश्मीर सरकार
क्रियान्वयन एजेंसी हस्तशिल्प और हथकरघा निदेशालय कश्मीर/जम्मू
लाभार्थी केंद्र शासित प्रदेश के शिल्पकार और शिल्पकार
उद्देश्य शिल्प क्षेत्र को विकसित करने के साथ-साथ केंद्र शासित प्रदेश में शिल्पकारों और कारीगरों के कल्याण और बेहतरी को सुनिश्चित करना।

उद्देश्य और लाभ:

  • योजना का मुख्य उद्देश्य केंद्र शासित प्रदेश में शिल्प क्षेत्र को पुनर्जीवित और विकसित करना है।
  • इसका उद्देश्य शिल्पकारों और कारीगरों को सहायता प्रदान करना भी है।
  • इस योजना के तहत प्रशिक्षण केंद्रों के मेधावी प्रशिक्षुओं को उनके कौशल उन्नयन के लिए प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा।
  • यह कारीगरों की मजदूरी आय में सुधार करता है।
  • इसका उद्देश्य प्रशिक्षुओं के लिए उद्यमिता कौशल और योग्यता को आत्मसात करने के लिए उत्पादक संगठनों के साथ संबंध बनाना भी है।
  • इस योजना के तहत प्रशिक्षुओं और कारखण्डरों को वित्तीय सहायता भी प्रदान की जाएगी।
  • यह योजना केंद्र शासित प्रदेश के शिल्पकारों और कारीगरों की बेहतरी और कल्याण सुनिश्चित करेगी।

पात्रता:

  • हस्तशिल्प एवं हथकरघा विभाग द्वारा संचालित प्रशिक्षण केन्द्रों से मेधावी प्रशिक्षु उत्तीर्ण।
  • हालांकि, यह सुस्त शिल्प के मामले में लागू नहीं होगा।
  • एक चिन्हित छोटे कारखाने के लिए न्यूनतम पांच प्रशिक्षुओं की आवश्यकता होगी और एक बड़े कारखाने के लिए अधिकतम दस प्रशिक्षुओं की आवश्यकता होगी।

योजना विवरण:

  • जम्मू और कश्मीर सरकार ने शिल्प क्षेत्र को पुनर्जीवित करने और विकसित करने के लिए केंद्र शासित प्रदेश में कारखानदार योजना शुरू की।
  • यह केंद्र शासित प्रदेश के कारीगरों और शिल्पकारों की सहायता करता है।
  • इस योजना को हस्तशिल्प एवं हथकरघा विभाग द्वारा शुरू में पायलट आधार पर लागू किया जाएगा।
  • विभाग योजनान्तर्गत विभागीय प्रशिक्षण केन्द्रों के रजिस्टर के मेधावी उत्तीर्ण प्रशिक्षुओं/पूर्व प्रशिक्षुओं को प्रोत्साहित करेगा।
  • अखरोट की लकड़ी की नक्काशी, कनी शॉल बुनाई, पेपर माची शिल्प, टेपेस्ट्री, विलो विकर और अन्य शिल्प को प्राथमिकता दी जाएगी।
  • आवेदन पत्र उद्योग और वाणिज्य विभाग की आधिकारिक वेबसाइट @jkindustriescommerce.nic.in पर अधिसूचना पीडीएफ में उपलब्ध हैं।
  • पंजीकरण कार्ड विभाग द्वारा जारी किए जाएंगे।
  • अधिकारी जन धन योजना के तहत कारीगरों को उनके बैंक खाते खोलने में सहायता करेंगे।
  • पहचान पत्र संख्या, फोटो, आधार संख्या, बैंक खाता विवरण इत्यादि जैसे विवरण सहित कारीगरों का एक पूरा डेटाबेस बनाए रखा जाएगा।
  • प्रशिक्षुओं को नामांकित करने के इच्छुक कारखण्डरों को अधिसूचना पीडीएफ में ही उपलब्ध एक अलग फॉर्म भरना होगा।
  • कारीगरों के समूह को कारीगरों के समूह को आवश्यक रसद जैसे उपकरण, उपकरण, कच्चा माल, स्थान आदि प्रदान किया जाएगा।
  • कारखण्डरों को रसद पर उनके द्वारा किए गए खर्च के खिलाफ सरकार २५००० रुपये की एकमुश्त वित्तीय सहायता प्रदान करेगी।
  • यह सहायता दो समान किश्तों में प्रदान की जाएगी।
  • सरकार प्रशिक्षुओं को २००० रुपये प्रतिमाह वजीफा देगी।
  • यह सहायता राशि सीधे बैंक हस्तांतरण के माध्यम से संबंधित बैंक खातों में प्रदान की जाएगी।
  • योजना के तहत प्रशिक्षण या परिवीक्षा अवधि छह महीने की होगी।
  • यह योजना कौशल उन्नयन में मदद करेगी और कारीगरों की आय को बढ़ावा देगी।
  • यह केंद्र शासित प्रदेश में शिल्प क्षेत्र को पुनर्जीवित करेगा जिससे शिल्पकारों और कारीगरों का कल्याण सुनिश्चित होगा।

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