आयकर विभाग मुखबिर पुरस्कार योजना: आयकर चोरी को सूचित करें और ५ करोड़ रुपये तक कमाएं

केन्द्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीडीबीटी) ने आयकर विभाग मुखबिर पुरस्कार योजना सुरु की है| इस योजना के तहत आयकर चोरी को सूचित करने पर ५ करोड़ रुपये तक तक का इनाम दिया जायेगा। इस योजना के तहत कोई भी कर चोरी (टैक्स चोरी) की रिपोर्ट कर सकता है और ५  करोड़ रुपये तक का इनाम प्राप्त कर सकता है। भारत और विदेश में आयकर चोरी करने वालो की जानकारी प्राप्त करने के लिए यह अभिनव उपक्रम आयकर विभाग द्वारा सुरु किया गया है| मुखबिरों का नाम और पहचान सरकार द्वारा गोपनीय रखी जाएगी। यह योजना आयकर विभाग (आईटी) अधिनियम, १९६१, ब्लैक मनी (अनजान विदेशी आय और संपत्ति) के प्रावधानों और कर अधिनियम २०१५ के प्रभाव के तहत पर्याप्त कर चोरी के तहत लागू की गई है। इस योजना को पहली बार २००७ में सुरु किया गया था और इस योजना २०१५  में संशोधित किया गया है ।

Income Tax Informants Rewards Scheme (In English)

आयकर मुखबिरों पुरस्कार योजना क्या है?टैक्स चोरी के बारे में जानकारी प्राप्त करने के लिए केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड द्वारा संचालित योजना जो मुखबीरोंको ५ करोड़ तक के इनाम से पुरस्कृत करता है|

अद्यतन: योजना २०१८  में फिर से शुरू की गई है और आयकर विभाग मुखबिर पुरस्कार योजना २०१८  के रूप में इस योजना को जाना जाता है और इनाम राशि अब ५ करोड़ रुपये करोड़ है| इससे पहले मुखबिरों को तत्काल इनाम के रूप में १ लाख का भुगतान किया जाता था और बाद में वास्तविक कर वसूली के आधार पर बरामद राशि का १०% के  तत्काल पुरस्कार के रूप में मुखबिर को प्रदान किया जाता था और बाद में १५  लाख का भुगतान किया जाता है।

आयकर मुखबिरों पुरस्कार योजना के लिए पात्रता:

  • यह योजना सभी के लिए खुली है।
  • कोई भी व्यक्ति आयकर चोरी की रिपोर्ट कर सकता है।

कर चोरी को कैसे सूचित करें?

  • इस योजना का लाभ उठाने के लिए मुखबिर के पास करदाता की विशिष्ट जानकारी होनी चाहिए।
  • मुखबिर के पास करदाता के कर चोरी पर विशिष्ट विवरण होना चाहिए।
  • अनुबंध ए और अनुबंध बी में लिखित बयान में विशिष्ट विवरण के साथ रिपोर्ट की जानी चाहिए (अनुबंध ए और अनुबंध बी डाउनलोड करने के लिए यहां क्लिक करें)

पुरस्कार राशि:

  • भारत और विदेशों में कर बकाएदरों के मुखबिर को ५ करोड़ रुपये का इनाम मिलेगा।
  • इनाम केवल वसूली योग्य करों की राशि पर लागू होता है।
  • इनाम राशी करों की राशि पर लागू नहीं होती है जिसे पुनर्प्राप्त नहीं किया जा सकता है।

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